विशेष वृतान्त

सीबीआई रेड के बाद भी कोल माफिया सक्रिय?

महामाया कोल वॉशरी के भागीदार व सेलेब्रिटी विकी जैन का घुग्घुस में गुप्त दौरा, चर्चाओं का बाजार गर्म ?. 13,000 करोड़ के कोयला घोटाले की जांच तेज!

पूर्णसत्य राष्ट्रीय न्यूज नेटवर्क चंद्रपूर। दि १८ दिसम्बर

१० दिसंबर को सीबीआई द्वारा की गई छापामारी के बाद कोल माफिया और कोल वॉशरी संचालकों में  यद्यपि हड़कंप मचा हुआ है। बावजूद इस कार्रवाई के कोल माफिया नेटवर्क अब भी सक्रिय नजर आ रहा है। ऐसी जानकारी हमारे विश्वसनीय सूत्रों से मिली है।

सूत्रों के मुताबिक, बुधवार १७ दिसंबर को दोपहर करीब २ बजे महामाया कोल वॉशरी के संचालक एवं कथित भागीदार विकी जैन अपनी “कोल एक्सपर्ट” टीम के साथ घुग्घुस (बेलसनी परिसर) पहुंचे। बताया जा रहा है कि सीबीआई की चल रही जांच को लेकर घुग्घुस स्थित वॉशरी कार्यालय में वहां कार्यरत अधिकारियों और संबंधितों के साथ गहन चर्चा की गयी। इसके बाद शाम करीब ७ बजे विकी जैन अपनी टीम के साथ घुग्घुस से चंद्रपुर स्थित होटल एन.डी. पहुंचे, जहां एक बड़े कोल व्यापारी और वॉशरी संचालक के साथ बंद कमरे में बैठक होने की जानकारी सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 कई बड़े सवाल उठते दिखाई दे रहे हैं?

क्या बिलासपुर के अग्रवाल समूह द्वारा संचालित कोल वॉशरीज  विगत कई वर्षों से मध्यप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रही हैं?

इस पूरे नेटवर्क को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने की जानकारी मिल रही है?

कुछ बड़े अधिकारियों की शह पर कथित तौर पर सरकारी खजाने को लूटा गया? वह अधिकारी कौन है?

 सीबीआई की जांच के दायरे में ये कंपनियां!

सूत्रों की मानें तो हिंद एनर्जी से जुड़ी कई कंपनियों पर सीबीआई ने सबसे पहले शिकंजा कसा है, जिनमें प्रमुख रूप से

हिंद महामिनरल्स बेनिफिशरी कोल वॉशरी, उसगांव, घुग्घुस, जिला चंद्रपुर

हिंद महामिनरल कोल वॉशरी, पिंपलगांव, जिला यवतमाल

क्लीन कोल एंटरप्राइजेस प्रा. लि., वॉशरी म्हातारदेवी, घुग्घुस

महामाया इन्फ्रा डेवलपर्स, कोल वॉशरी म्हातारदेवी, घुग्घुस

सूत्र बताते हैं कि इन कंपनियों के निदेशक मंडल में राजीव अग्रवाल सहित अन्य लोग और विकी जैन के नाम सामने आ रहे हैं। यदि सीबीआई निष्पक्ष और सघन जांच करती है, तो महाराष्ट्र की कोयला खदानों से जुड़े लगभग १३००० करोड़ से अधिक के कथित घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है।

१० दिसंबर की कार्रवाई के बाद से संबंधित कंपनियों द्वारा  बडी हेराफेरी शुरू किए जाने और अंदरूनी लेन-देन फिलहाल रोक दिए जाने की जानकारी भी सामने आ रही है, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि माफिया नेटवर्क जांच के दबाव में बैकफुट पर है।

कुछ सुलगते सवाल देश के सम्मुख है

क्या सीबीआई इस कोल माफिया की पूरी चेन तोड़ पाएगी?

जांच में किन नेताओं और अफसरों के नाम सामने आएंगे?

क्या १३००० करोड़ से अधिक के इस कथित घोटाले में दोषियों को सजा मिलेगी?

 

 

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